प्रभु बस तुम्हारी याद आये
प्रभु बस तुम्हारी, तुम्हारी याद आये तुम्हारी हँसी हो, और अधर मुस्कुराये मुझे बस तुम्हारे , तुम्हारे ख्याल आये तुम्हारे ख़यालों में, मन सुकून पाए मैं बस तुम्हारे , तुम्हारे विम्ब पाऊँ उन्ही झलकियों में सब भूल जाऊँ प्रभु बस तुम्हारी, तुम्हारी याद आये I तुम्हारी हँसी हो, और अधर मुस्कुराये II तुम्हारी हो ख़ुश्बू और जग महका जाए तुम्हारी हो ख़ुश्बू और मन बहका जाए तुम्हारी लगन में हर क्षण निकला जाए तुझमें मगन मन, तन भी हुलसा जाए तुम्हारी अदाओं में सब कुछ भूलता जाए प्रभु बस तुम्हारी, तुम्हारी याद आये I तुम्हारी हँसी हो, और अधर मुस्कुराये II साभार 🙏 🙏 श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA)