जो तुम्हारे और मेरे बीच में है केवल वही प्रेम है बाकी कुछ और मुझे सिर्फ आकर्षण मात्र लगता कभी कोई अच्छा और बेहतर प्रतीत हो भी सकता है कभी कोई मुझे संवेदित कर सकता है बावज़ूद जो सत्य है प्रभु की मेरा तुमसे सम्बन्ध ही प्रेम है किसी और रिश्ते का नाम नहीं न तुम मात-पिता या सखा न तुम साजन , न तुम मेरे भगवन तुम तो केवल तुम ही प्रभु मेरे और पूर्णतया मेरे हो प्रभु मैंने देखा हमेशा से साथ निभाते जब मैं कुछ भी समझती नहीं थी जब मैं कुछ-कुछ जानने लग गयी थी तब भी देखा तुम्हे हँसते -मानते जीवन की धूप ने कई बार झुलसाया अनगढ़ विवेक ने बहुत भटकाया हर राह प्रभु तुम मुझे सँभालते रहे कभी पुचकारते तो कभी किसी रीति सँवारते रहे बहुत तारीफ बटोरी मैंने उम्र भर ईमान जानता है, सब पर हक़ तुम्हारा है तुम्हारा प्रेम मुझे तुम्हारे समीप ले आया समीप इतना की बाकी सब व्यर्थ नज़र आया | | साभार 🙏 🙏 श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA)