तुम बिन किसको चाहूँ प्रभु

तुम बिन किसको चाहूँ प्रभु
कोई इतना भाया नहीं
जाऊं किधर , किस ओर प्रभु
तुम बिन कोई रास आया नहीं
चिंतन में हर पल अंतर (दिल ) रहे 
तुम्हारे सिवा कुछ पाया नहीं

तुम बिन किसको चाहूँ प्रभु
कोई इतना भाया नहीं।। 

तुम बिन कहाँ ठौर पाऊं प्रभु
किसी ठौर ने अपनाया नहीं
दस्तक भी तेरी , ठाकुर भी तू ही
किसी ने ऐसे गले लगाया नहीं

तुम बिन किसको चाहूँ प्रभु
कोई इतना भाया नहीं।। 

तुम पर ही रुकते सारे डगर अब
तुमसे ही केवल मेरा वास्ता है 
तुम्हारे बिना सब मंझधार जैसा 
किनारों में भी राह ग़ुम हो कहीं

तुम बिन किसको चाहूँ प्रभु
कोई इतना भाया नहीं।। 



Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

समस्याओं को समय पर छोड़ दो.

सब भूल जाएँ

आज तेरी शिवा