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Showing posts from August, 2020

तुमसे कहना चाहूँ बस एक बात सखी

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मैं तुमसे कहना चाहूँ बस एक बात सखी प्रभु जो मुझसे बेहद प्रेम करता है वही ईश्वर तुम्हे भी बहुत चाहता है मुझे उसका प्रेम ही चैन से एक जगह स्थिर होने नहीं देता और तुम्हे उसका प्रेम ही अन्य -अन्य कारणों से बेचैन कर जाता है मुझसे बेहतर यह कौन जानता है प्रिय सखी वह तुम्हे अब भी निहार रहा और मेरी- तुम्हारी बात सुन रहा तुम पर आशावादी बन कर तुम्हे दिल में बिठाना चाहता है तुम्हे हो अपनाना चाहता है || जिस ईश्वर को तुमने ढूँढा बहुत आज आया वो स्वयं निकट बस तुम भी एक पग बढ़ाओ अनुभव करो उसको सन्निकट उसकी पनाहों में प्रेम अपार विशवास करो मेरा सखी तुम्हारा संग सदा निभाएगा करो यकीं ज्यों मेरा बार बार निभाया है वैसे ही तुम पर भी प्रेम लुटायेगा मैं तुमसे कहना चाहूँ बस यही एक बात सखी प्रभु जो मुझसे बेहद प्रेम करता है वही ईश्वर तुम्हे भी बहुत चाहता है || तुमने उन्हें उनके स्वरुप में कभी नहीं याद किया उनको , उनके निवास पर भी नहीं तलाशा था अलग -अलग मंदिर, गिरजाघर कब मस्जिद , गुरूद्वारे में, कब वह तीर्थों में विराजा था पर तुमने बस ढूँढा उसी और तभी न मिली पहचान की कोई डोर वह दीनदयाला लेकिन सखी तुम्हारी अन्तः तड़प...

आज तेरी शिवा

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  प्यारे शिव, आज तेरी शिवा होने को जी चाहता है जो है अनुपम सौंदर्य में प्रतिष्ठित उसमें हृदयंगम होना चाहता है जिसके पास विपुल शक्तियाँ है उस पर मनस आश्रय चाहता है मेरे अंतस का भाव -भाव अब केवल तुम्हारा करावलम्ब चाहता है मीठे शिव, तुमसे जग की सृष्टि हुई है मुझ पर अपने प्रेम की वृष्टि करो क्षुद्र मन ; अपना औचित्य ढूंढें अब इस मन की भी संतुष्टि करो मुझ पर अपनी प्रिय दृष्टि करो आश्रय में रखा तुमने ? इसकी पुष्टि करो ! प्यारे शिव, आज तेरी शिवा होने को जी चाहता है........... जो अभिलक्षित या अभिशप्त है मुझे तुम्हारे संग सब स्वीकार है अनन्य पवित्रता से जो प्रचुर है उसके सामीप्य के लिए सब अंगीकार है कोमल दृष्टि का प्रभु अवलंब हो ! मुझे प्राप्त केवल तुम्हारा संग हो ! अवमानना का प्रसाद हो या गरल सा कोई प्रखर विषाद हो मुझे नाथ तुम्हारा बनने में स्वीकार सब क्या अपना कहने को तुम तैयार हो ?? प्यारे शिव, आज तेरी शिवा होने को जी चाहता है ....... साभार  🙏 🙏 श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA)

सब भूल जाएँ

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चलो आज सब भूल जाएँ कुछ भी याद न रहे रहे ना याद की हम हैं रहे ना याद की तुम हो रहे न याद की जग है रहे ना याद जगवाले है चलो आज सब भूल जाएँ भूल कर सब ; आनंद उत्सव मनायें II भूल जाएँ कि मुझसे-मेरा क्या है ? क्या कुछ पुराना , क्या कुछ नया है भूल जाएँ स्मृतियों का पुलिंदा भूलने का शुरू करे एक नया धंधा भूलते है सब परेशानियों को भूलते है हर एक की नादानियों  को चलो आज सब भूल जाएँ भूल कर सब ; आनंद उत्सव मनायें II याद करना कठिन प्रतीत होता है भूलना तो सहज घटित होता है भूलना भी कार्य लगे तुम्हे अगर तो यह भी भूल जाना सरलतम उपाय है ये खुशियों का स्वतः संपन्न होता प्रक्रिया भूलने का तो  फिर क्यों न नव एहसास करें  सब कुछ भूल जाने का प्रयास करे चलो आज सब भूल जाएँ भूल कर सब ; आनंद उत्सव मनायें II  साभार  🙏 🙏 श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA)  

तुझसे ही श्रृंगार मेरा

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माधुर्य केवल प्रभु तेरा तुझसे ही श्रृंगार मेरा तेरे स्नेहिल भाव पर  न्योछावर यह संसार मेरा नाथ, कहूँ कैसे सब बातें  सम्मुख भूल जाती हूँ तुमसे कहने को बहुत कुछ है परन्तु सुध सारी खो जाती हूँ तुमने स्नेह अपार किया इसलिए  प्रेम सागर में डूब जाती हूँ स्नेह स्मृति में रहता संचित तुममें ही स्वयं को पूर्ण पाती हूँ माधुर्य केवल प्रभु तेरा तुझसे ही श्रृंगार मेरा II  प्रेम -सुधा का पय लेकर  मेरा जीवन प्रदीप्त हुआ नाथ तुम्हारी सान्निध्य में मेरा अस्तित्व तृप्त हुआ पुलकित मेरा मन तुम से सुरभित, हर्षित हो रहा है स्नेह सुगन्धि पाकर तुम्हारी  अंतस मतवाला हो झूम रहा है  मृदुल कंठ नभ भी होकर  अपने अन्तः भाव जतलाता है  निर्मल बयार के चलने से प्रेममय अनुपम संयोग दर्शाता है माधुर्य केवल प्रभु तेरा तुझसे ही श्रृंगार मेरा II  साभार  🙏 🙏 श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA)

सच्चा मित्र

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सच्चा मित्र कैसे खींचूं उसका चित्र हर किसी खास 'अपने' को मित्रता की कसौटी पर कसा और पाया बड़ा विचित्र नहीं ! कोई मेरा सच्चा मित्र चिंतित हूं कैसा होता उसका चरित्र ? सच्चे मित्र के चरित्र पर चिंतन किया सगे-सम्बन्धी ,हम-उम्रों को भी शामिल किया चरित्र के मापदंड पर कोई न भाया जैसी उम्मीद लगाईं ; स्वयं को मित्र जर्जर पाया बड़ा अचम्भा सोचकर यह कैसी सच्चाई बिना मित्र जीवन भी एक कथित बुराई मन के गहरे जाकर , चिंतन में गोता मारा ढूंढ निकलूं एक किसी को जो हो मित्र प्यारा बैठ एकांत में मौन हो मैं सोचने लगी सामने प्रभु की तस्वीर पर नज़र ठिठक गयी प्रभु का स्नेह , सहयोग और प्रेम याद आया वही एक सच्चा मित्र मुझे बरबस ध्यान आया एक प्रभु ही सारी मुश्किलें विरल करते हैं सर्व सम्बन्धों से स्नेह देकर सरस करते हैं सच्चा मित्र बन तकलीफ़ में सहारा होते हैं मेरा राज़ को राज़ रख मुझे सम्बल देते हैं जीवन के अंत तक इस मित्रता का बल मिलता है प्रभु के साथ से सच्चा सुख सरल मिलता है  II साभार  🙏 🙏 श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA) tag