तुझसे ही श्रृंगार मेरा

माधुर्य केवल प्रभु तेरा
तुझसे ही श्रृंगार मेरा
तेरे स्नेहिल भाव पर 
न्योछावर यह संसार मेरा
नाथ, कहूँ कैसे सब बातें 
सम्मुख भूल जाती हूँ
तुमसे कहने को बहुत कुछ है
परन्तु सुध सारी खो जाती हूँ
तुमने स्नेह अपार किया इसलिए 
प्रेम सागर में डूब जाती हूँ
स्नेह स्मृति में रहता संचित
तुममें ही स्वयं को पूर्ण पाती हूँ

माधुर्य केवल प्रभु तेरा
तुझसे ही श्रृंगार मेरा II 



प्रेम -सुधा का पय लेकर 
मेरा जीवन प्रदीप्त हुआ
नाथ तुम्हारी सान्निध्य में
मेरा अस्तित्व तृप्त हुआ
पुलकित मेरा मन तुम से
सुरभित, हर्षित हो रहा है
स्नेह सुगन्धि पाकर तुम्हारी 
अंतस मतवाला हो झूम रहा है 
मृदुल कंठ नभ भी होकर 
अपने अन्तः भाव जतलाता है 
निर्मल बयार के चलने से
प्रेममय अनुपम संयोग दर्शाता है

माधुर्य केवल प्रभु तेरा
तुझसे ही श्रृंगार मेरा II 


साभार 🙏🙏

श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA)






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