आज तेरी शिवा

 


प्यारे शिव, आज तेरी शिवा
होने को जी चाहता है
जो है अनुपम सौंदर्य में प्रतिष्ठित
उसमें हृदयंगम होना चाहता है
जिसके पास विपुल शक्तियाँ है
उस पर मनस आश्रय चाहता है
मेरे अंतस का भाव -भाव अब
केवल तुम्हारा करावलम्ब चाहता है
मीठे शिव, तुमसे जग की सृष्टि हुई है
मुझ पर अपने प्रेम की वृष्टि करो
क्षुद्र मन ; अपना औचित्य ढूंढें
अब इस मन की भी संतुष्टि करो
मुझ पर अपनी प्रिय दृष्टि करो
आश्रय में रखा तुमने ? इसकी पुष्टि करो !


प्यारे शिव, आज तेरी शिवा
होने को जी चाहता है...........


जो अभिलक्षित या अभिशप्त है
मुझे तुम्हारे संग सब स्वीकार है
अनन्य पवित्रता से जो प्रचुर है
उसके सामीप्य के लिए सब अंगीकार है
कोमल दृष्टि का प्रभु अवलंब हो !
मुझे प्राप्त केवल तुम्हारा संग हो !
अवमानना का प्रसाद हो या
गरल सा कोई प्रखर विषाद हो
मुझे नाथ तुम्हारा बनने में स्वीकार सब
क्या अपना कहने को तुम तैयार हो ??


प्यारे शिव, आज तेरी शिवा
होने को जी चाहता है .......


साभार 🙏🙏
श्वेता योगेश शर्मा (BK SHWETA)


Comments

Popular posts from this blog

समस्याओं को समय पर छोड़ दो.

सब भूल जाएँ