सब भूल जाएँ
चलो आज सब भूल जाएँ
कुछ भी याद न रहे
रहे ना याद की हम हैं
रहे ना याद की तुम हो
रहे न याद की जग है
रहे ना याद जगवाले है
चलो आज सब भूल जाएँ
भूल कर सब ; आनंद उत्सव मनायें II
भूल जाएँ कि मुझसे-मेरा क्या है ?
क्या कुछ पुराना , क्या कुछ नया है
भूल जाएँ स्मृतियों का पुलिंदा
भूलने का शुरू करे एक नया धंधा
भूलते है सब परेशानियों
को
भूलते है हर एक की नादानियों
को
चलो आज सब भूल जाएँ
भूल कर सब ; आनंद उत्सव मनायें II
याद करना कठिन प्रतीत होता है
भूलना तो सहज घटित होता है
भूलना भी कार्य लगे तुम्हे अगर
तो यह भी भूल जाना
सरलतम उपाय है ये खुशियों का
स्वतः संपन्न होता प्रक्रिया भूलने का
तो फिर क्यों न नव एहसास करें
सब कुछ भूल जाने का प्रयास करे
चलो आज सब भूल जाएँ
भूल कर सब ; आनंद उत्सव मनायें II

Comments
Post a Comment